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फागुनी पशु मेला में रोमांचक घोड़ा दौड़ में पटना के रुदल गोप ने मारी बाजी

बाबा बरमेश्वर नाथ नगरी में उमड़ी भारी भीड़

बक्सर जिले की पावन धरती पर स्थित बाबा बरमेश्वर नाथ नगरी में आयोजित ऐतिहासिक फागुनी पशु मेला इस वर्ष भी परंपरा, रोमांच और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम बनकर उभरा। मेले का मुख्य आकर्षण घोड़ा दौड़ प्रतियोगिता रही, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से आए घोड़ा मालिकों, व्यापारियों और दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मेला परिसर में व्यापारी संघ एवं घोड़ा मालिकों ने सर्वसम्मति से भव्य घुड़दौड़ का आयोजन किया, जिसमें तीन दर्जन से अधिक घोड़े एवं घोड़ियों ने भाग लिया।

मुख्य प्रतियोगिता में पटना के रुदल गोप ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनके घोड़े “बाबर” के घुड़सवार मेघु ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ दिया। द्वितीय स्थान रघुनाथपुर, बेगूसराय के प्रिंस यादव को मिला, जबकि तृतीय स्थान गंगौली, बक्सर के योगेंद्र ठाकुर ने हासिल किया। विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया गया।

विशेष पुरस्कार के रूप में केशोवपुर, बक्सर के छोटू मुखिया को सम्मानित किया गया। उनके घोड़े “वीरु” ने अपनी चुस्ती और संतुलन से दर्शकों का दिल जीत लिया। वहीं “दो दांत” वर्ग की दौड़ में धामनिया, आरा के पुतुल चौबे का घोड़ा प्रथम रहा। घोड़ी वर्ग में नियाज़ीपुर के हीरा यादव की घोड़ी ने बाजी मारी, जबकि अन्य प्रतिभागियों ने भी जोरदार टक्कर दी।

छकरी (बच्चा घोड़ा/घोड़ी) दौड़ ने भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। सभी प्रतियोगिताएँ पाँच-पाँच राउंड में संपन्न कराई गईं, जिससे प्रतिस्पर्धा और भी रोमांचक हो उठी। आयोजन स्थल पर सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और व्यवस्था के पुख्ता इंतज़ाम किए गए थे, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

व्यापारी संघ के सदस्यों ने बताया कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ मेले की परंपरा को जीवित रखने के साथ-साथ घोड़ा पालन और व्यापार को भी प्रोत्साहन देती हैं। ऐतिहासिक फागुनी पशु मेला एक बार फिर अपनी गरिमा और भव्यता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

ब्रह्मपुर से धीरज कुमार की रिपोर्ट

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