बिहार में मशरूम खेती को कृषि दर्जा, किसानों को बड़ी राहत
सस्ती बिजली और सब्सिडी से मशरूम उत्पादकों की आय बढ़ेगी

बिहार सरकार ने राज्य के मशरूम उत्पादक किसानों के हित में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय लिया है। मशरूम उत्पादन को अब व्यावसायिक खेती की श्रेणी से हटाकर विधिवत खेती की श्रेणी में शामिल कर दिया गया है। इस फैसले के बाद मशरूम उत्पादक किसानों को सामान्य किसानों की तरह ही कृषि दर पर बिजली उपलब्ध होगी। अब उन्हें मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली बिल का भुगतान करना होगा, जिससे उनकी उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।
यह निर्णय राज्य में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने, किसानों की आय में वृद्धि करने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बिहार सरकार पहले से ही मशरूम उत्पादन से जुड़े किसानों को अन्य मदों में लगभग 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। इसमें प्रशिक्षण, आधारभूत संरचना, बीज, तकनीकी सहायता और विपणन से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं।
कृषि विभाग, बिहार सरकार के अनुसार मशरूम उत्पादन कम भूमि, कम पानी और कम समय में अधिक आय देने वाली खेती है। खासकर युवा किसान, महिला स्वयं सहायता समूह और छोटे किसान इस क्षेत्र में तेजी से आगे आ रहे हैं। सरकार के इस फैसले से उन्हें आर्थिक संबल मिलेगा और वे आधुनिक तकनीक के साथ मशरूम उत्पादन को और विस्तार दे सकेंगे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए कार्य कर रही है। यह निर्णय “किसानों की आय दोगुनी” और “आत्मनिर्भर भारत” के संकल्प को मजबूती प्रदान करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बिहार देश के प्रमुख मशरूम उत्पादक राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।




