बिहारी लोगों को ‘फ्री में बंदूक-राइफल’ देने की बजाय ‘रोजगार’ देने की सोच हो!


पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि कुशवाहा ने एक खास समाज के लोगों को फ्री बंदूक का लाइसेंस देने की मांग कर डाली है. यह बयान ख़ासा चर्चित भी हुआ.
बिना लाग-लपेट के उन्होंने कहा है कि एक खास समाज के नेताओं की हत्या हो रही है, और सरकार उनकी रक्षा करने में असमर्थ है, इसीलिए उनकी सरकार बनने पर लोगों को लाइसेंस फ्री राइफल दिया जाएगा. इतना ही नहीं! नेताजी ने अमेरिका का हवाला देते हुए कहा कि जिस प्रकार से अमेरिका में बंदूकों के लिए फ्री लाइसेंस है, अर्थात मार्केट से जाकर बंदूक खरीदो और रख लो, ठीक वैसा ही फ्री हथियार लाइसेंस मॉडल यह बिहार में भी लागू कर देंगे.
चलिए किसी मामले में तो बिहार का कोई नेता अमेरिका से अपने राज्य की तुलना कर रहा है!
यह मजाक ही तो है! आखिर बिहार में ‘जंगलराज’ पर खूब चर्चा हुई, तो उसके पीछे कुछ कारण तो अवश्य ही रहा होगा. पिछले कई सालों से देश भर में ‘बिहारी’ कहकर लोगों का अपमान किया जाता है, वह दर्द भला ये ‘नेताजी’ लोग क्या समझेगा!
कानून को ठेंगा दिखाने की सोच के कारण ही तो बिहार और बिहारी लोगों ने इतना कुछ सहा है, अब फिर से वही बात होगी, तो दर्द तो होगा ही न… आखिर सबको बंदूक देने से आग ही तो लगेगी और अपहरण होगा, हत्या होगी.
न केवल एक राजनेता, बल्कि यहां तो सुशासन बाबू का राज है, और पहले की तुलना में बिहार में बहुत सुधार भी हुआ है, लेकिन फिर भी ‘जंगल राज’ और अपराध बढ़ने की आवाज आखिर कहाँ से और क्यों उठती है, यह केवल सरकार को ही नहीं, बल्कि समस्त बिहारी लोगों को विचार करना चाहिए.
हकीकत तो यह है कि बिहार के लोगों को विकास के पथ पर आगे बढ़ने का रास्ता दिखाना चाहिए. आखिर, हमारे यहाँ रोजगार होगा, तो काहे लोग इधर – उधर जायेगा, और कभी महाराष्ट्र तो कभी तमिलनाडु में मार खायेगा?
पर यहाँ अमेरिका से बराबरी बन्दूक बांटने में करने की सोच है नेता लोगों में, अमेरिका में लोग कैसे और कितना पैसा कमाते हैं, कैसे बिजनेस करने की सुविधा है, वह कौन सोचने की ज़हमत उठाये!
बिहारी लोगों को सच में मूर्ख बनाना इतना आसान है न, तभी तो यहाँ बात-बात पर धरना होता है, प्रदर्शन होता है, लेकिन उन सबका मुद्दा विकास नहीं होता है. बस राजनीति और बयानबाजी.
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