बिहार

नेशनल पैरा शूटिंग चैंपियनशिप में बिहार के महेश का बजा डंका

अगर हौसला बुलंद हो तो तरक्की का रास्ता खुद ब खुद खुल जाता है। बुलंद इरादे से इंसान कुछ भी कर सकता है। नवादा जिले के पकरीबरांवा प्रखंड का पीड़पड़वा गांव का रहने वाले महेश कुमार की कहानी भी कुछ ऐसी है। महेश ने दिव्यांग होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और अपने सपने को पूरा करने के लिए कठोर मेहनत की, जिसके परिणामस्वरूप महेश ने मध्य प्रदेश के मऊ में संपन्न हुई पैरा शूटिंग की नेशनल चैंपियनशिप में अपना वर्चस्व कायम रखा। महेश देश में आठवां और राज्य में पहले स्थान पाया और सफलता हासिल की। महेश का कहना है कि अगर मजबूत इरादे हो तो सफलता मिल ही जाती है। महेश ने पहले प्रयास में यह उपलब्धि हासिल की है। यह दस दिवसीय टूर्नामेंट मध्य प्रदेश के मऊ में 10 से 20 दिसंबर तक चला। जिसमें सभी राज्यों की टीमों ने भाग लिया। वहीं बिना कोच के ही महेश कुमार ने देश में आठवां और राज्य में पहले स्थान प्राप्त किया।

सरकार की मदद मिले तो गोल्ड मेडल का होगा लक्ष्य
देश में आठवां स्थान प्राप्त करने वाले महेश जन्म से ही पोलियो के शिकार हैं। मेहश के पिता एक मध्यम वर्गीय किसान हैं। दो भाई एवं एक बहन है, बहन की शादी हो चुकी है। महेश ने प्रारंभिक पढ़ाई अपने ननिहाल जमुई जिले के नावाडीह गांव से की है। वहीं इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन नालंदा जिला के बिहार शरीफ से किया है। उन्होंने ये सभी बातें दैनिक जागरण टीम से बताते हुए कहा कि आर्मी, पैरामिलिट्री के साथ खेला हूं। महेश ने कहा कि इसी साल अप्रैल में ही कल्याण बिगहा में एडमिशन लिया और इस साल रिजल्ट अच्छा रहा। आगे उन्होंने कहा कि मेरा मिशन 2024 में पैरा ओलिंपिक खेल में पेरिस जाना है। सरकार की मदद हो और मुझे एक कोच मिल जाये तो मेरा लक्ष्य देश के लिए गोल्ड मेडल के लिए होगा।महेश को बीपीएससी परीक्षा के सवाल से मिली प्रेरणा
बता दें महेश बीपीएससी 67वीं परीक्षा की तैयारी में लगे हुए थे, तभी अचानक लॉक-डाउन लग गया और घर आ कर पढ़ाई करने लगे। वहीं आनलाइन पढ़ाई के दौरान टोक्यो ओलंपिक में पैरा ओलंपिक का सवाल आया तो वहीं से जिज्ञासा मिली। तब लोगों से पूछने पर पता चला कि दिव्यांग भी ओलिंपिक खेल सकता है तभी तत्कालीन डीएम यशपाल मीणा से मिलकर अप्रैल 2022 में ही कल्याण बिगहा में एडमिशन लिया और प्रैक्टिस जारी रखा।

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