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लगातार 7वें साल दिल्ली के गणतंत्र दिवस परेड से क्यों रिजेक्ट हो रही है बिहार की झांकी

दिल्ली में 26 जनवरी को होने वाली परेड में लगातार सातवें साल बिहार की झांकी दिखाई नहीं देगी। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में इस बार भी बिहार की झांकी को शामिल नहीं किया गया है। केंद्र की विषय विशेषज्ञ समिति ने ‘गयाजी बांध’ थीम पर आधारित प्रस्तावित झांकी को खारिज कर दिया है। राज्य के सूचना और जनसंपर्क विभाग के मुताबिक, प्रस्तावित झांकी गणतंत्र दिवस परेड के लिए निर्धारित जरूरी मानदंडों को पूरा नहीं करती है। ऐसे में इसे परेड का हिस्सा नहीं बनाया गया।
फल्गु नदी पर बने रबर डैम की थी थीम
विभाग के जुड़े वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गया में फल्गु नदी पर सीएम नीतीश कुमार ने इसी साल सितंबर में देश के सबसे लंबे रबर डैम का उद्घाटन किया था। इसे ही बिहार की ओर से गणतंत्र दिवस परेड की झांकी के लिए तय किया गया। इस विषय को इसलिए सेलेक्ट किया गया क्योंकि इसका सांस्कृतिक महत्व है। हालांकि, ‘गयाजी डैम’ पर आधारित थीम को कमिटी ने रिजेक्ट कर दी गई। अधिकारी ने बताया कि चयन प्रक्रिया के लिए आमतौर पर 4 से 5 बैठक हुई। हालांकि, रक्षा मंत्रालय की ओर से सौंपी गई विशेषज्ञ समिति के साथ दो दौर की बैठक के बाद, हमें दूसरे दौर के लिए आमंत्रित नहीं किया गया।
लगातार 7वें साल रिजेक्ट हुई बिहार की झांकी
कला और संस्कृति के अलग-अलग विषयों में एक्सपर्ट लोगों वाली विशेषज्ञ समिति परेड के लिए झांकी का चयन करती है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अप्रूवल से पहले कमिटी थीम, अवधारणा, डिजाइन और इसके विजुअल इम्पैक्ट के आधार पर प्रस्तावों की जांच करती है। ये पहली बार नहीं जब बिहार की झांकी रिजेक्ट की गई है। पिछले साल यानी 2021 में ‘गांधी के पदचिन्हों पर अग्रसर बिहार’ थीम वाली झांकी को चयन समिति ने खारिज कर दिया था।
2016 के गणतंत्र दिवस परेड में झांकी आई थी नजर
2017 में झांकी का विषय था विक्रमशिला, एक प्राचीन शैक्षिक केंद्र, जिसे रिजेक्ट किया गया। 2018 में ‘छठ पर्व’, 2019 में ‘शराबबंदी’ और 2020 में जल-जीवन-हरियाली मिशन की थीम को भी खारिज कर दिया गया था। बिहार सरकार की पिछली झांकी 2016 के गणतंत्र दिवस परेड में नजर आई थी, उस समय इसकी थीम ‘1917 के चंपारण आंदोलन’ पर थी।
इसलिए नहीं शामिल की गई झांकी
झांकी को शामिल नहीं किए जाने के कारणों पर टिप्पणी करते हुए एक अधिकारी ने बताया कि ये चयन कई पैरामीटर्स पर निर्भर करता है। जिसमें विजुअल अपील, जनता पर प्रभाव, विचार, विषय, संगीत और झांकी में शामिल जरूरी डिटेल्स भी शामिल है। 2016 में बिहार की झांकी को जब ग्रीन सिग्नल दिया था तो उसकी कई वजहें थीं। अधिकारी ने बताया कि कमिटी ने उस समय महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह जैसे ऐतिहासिक स्थानों और घटनाओं के इर्द-गिर्द घूमती थीम को प्राथमिकता दी थी।

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