बिहार: शिक्षा मंत्री के बजट भाषण पर भाजपा विधायकों ने किया हंगामा

होली की छुट्टियों के बाद सोमवार को विधानसभा का सत्र फिर से शुरू हुआ। आज सातवें दिन की बैठक की शुरुआत ही हंगामे से हुई। इधर, शिक्षा बजट पर कटौती का प्रस्ताव भाजपा द्वारा लाया गया। इसपर पर चर्चा करते हुए विधायकों ने कहा कि जीवेश कुमार ने कहा कि पहले हस्ताक्षर से 10 लाख युवाओं को रोजगार का दावा करने वाले के राज्य में टीईटी पास अभ्यर्थी बिना नौकरी के रोड पर घूम रहे हैं। कई नौकरियों की सारी प्रक्रिया होने के बाद भी नियुक्ति रुकी हुई है। उन्होंने कहा कि बजट में बताने के लिए सरकार के पास नया कुछ नहीं था। कई प्रावधान तक पिछले वाले ही दुहरा दिए गए कि फलां करेंगे।
इधर, शिक्षा मंत्री डॉ. चंद्रशेखर ने जैसे ही अपने विभाग की बजट भाषण की शुरूआत की, वैसे भाजपा विधायकों ने हंगामा शुरू कर दिया। भाजपा विधायकों ने वॉकआउट कर दिया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि बाबा साहेब ने कहा कि शिक्षा शेरनी का दूध है जो पीयेगा वह दहाड़ेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरसंघचालक ने ग्रंथों की समीक्षा की बात कही। यह बात मैंने नहीं कही। शिक्षा मंत्री गीताप्रेस गोरखपुर से प्रकाशित रामचरित मानस को सदन में दिखाया।
जीवेश कुमार ने पिछले बजट के दौरान राजद के विधायकों के बयानों का एक-एक कर जिक्र किया और पूछा कि उस समय आप विपक्ष में थे तो यह बातें कह रहे थे, अब तो सत्ता पक्ष में हैं…जवाब दीजिए।
विधायक प्रतिमा देवी अपने संबोधन के शुरुआत में “तामसो मा ज्योतिर्गमय” बोलने में लड़खड़ाई गईं। इसके बाद पलटवार करते हुए कहा कि माननीय सदस्य (जीवेश कुमार) जब फिक्र वाली कुर्सी पर बैठे थे, तब वह बेफिक्र थे। आज उन्हें चिंता हो रही है। मैं मांग करती हूं कि केंद्र सरकार जिस तरह से वन नेशन वन टैक्स लाया था। उसकी तरह वन नेशन वन एजुकेशन भी लागू होनी चाहिए। जब आप 15 साल तक सरकार के साथ थे तब आपको बिहार में शिक्षा की चिंता नहीं हुई है। आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के दलित और पिछड़े वर्ग के बच्चों को अच्छी शिक्षा देने की व्यवस्था करवाई। लाखों शिक्षक अभ्यर्थी नौकरी की तलाश में है
माले विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि बिहार के लाखों शिक्षक अभ्यर्थी नौकरी की तलाश में है। सातवें चरण की शिक्षक बहाली सरकार कब और किस नियमावली के तहत करेगी। शिक्षकों को लिए समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। पटना विश्वविद्यालय में जो फीस वृद्धि हुई है। उसे कम किया जाए। केंद्र की तरफ से इस देश की शिक्षा को वॉर जोन की तरह ट्रट किया जा रहा है। शिक्षा में फीस, वृद्धि, आरक्षण कटौती मोदी सरकार का ट्रेड मार्क बन चुकी है। शिक्षा का भगवाकरण किया जा रहा है। VC से लेकर PhD स्कॉलर के चयन तक RSS विचारधारा के प्रति वफादार होना देखा जा रहा है। कुल मिलाकर देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने की साजिश रची जा रही है। बिहार के विश्वविद्यालय में भ्रष्ट्राचार आम हो गया है। बिहार यूनिवर्सिटी एक्ट 1976 में आवश्यक संशोधन कर उसे राज्य सरकार की भूमिका तय की जाए। शिक्षा समवर्ती सूची में आती है। नई शिक्षा नीति को खारिज करने का प्रस्ताव भी सदन में लाया है। देश के भीतर “मोडानी पॉलिटिक्स” है। बिहार में कॉमन स्कूल सिस्टम लागू होना चाहिए। जब हम विपक्ष में थे भी यह मांग किए थे। यही सही वक्त है कि सरकार को इसके लिए फैसला लेना चाहिए।
उच्च शिक्षाओं की गड़बड़ी कहां से हो रही थी
ललित नारायण मंडल ने शिक्षा बजट के समर्थन में सत्ता की ओर से बोलते हुए राजभवन पर उंगली उठाई। कहा कि उच्च शिक्षा की गड़बड़ी कहां से हो रही थी, सभी को पता है। चॉकलेट के बगैर तो वहां से काम होता ही नहीं था, यह तो सब जानते हैं। उनका इशारा पूर्व राज्यपाल की ओर था।
शिक्षा मंत्री करने वाले हैं बजट पेश
विधानसभा में शिक्षा विभाग को मिलने वाले अनुदान को मंजूरी दी जानी है। शिक्षा मंत्री इसपर चर्चा करने वाले हैं। इसमें संभावना है कि वर्ष 2023-24 से ही राशि बढ़ाने पर मंजूरी मिलने जाएगी। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के लाभुकों के लिए भी आज का दिन खास होने वाला है।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की राशि बढ़ाई जाएगी
संभावना यह भी है कि स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की राशि 4 लाख से बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा राज्य के यूनिवर्सिटी में शोध कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से फैलोशिप देने का भी प्रस्ताव है। पढ़ाई के लिए विदेश जाने वाले सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को विशेष छात्रवृत्ति देने की भी याेजना देने की संभावना है।




