
बक्सर। जिले के महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि क्षेत्र गोकुल जलाशय के संरक्षण, संवर्धन एवं दीर्घकालिक प्रबंधन को लेकर मंगलवार को दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार के अंतर्गत भोजपुर वन प्रमंडल, आरा की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में जलाशय की समेकित प्रबंधन योजना (आईएमपी) के प्रभावी क्रियान्वयन और प्रबंधन प्रभावशीलता आकलन उपकरण के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कार्यशाला में वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशिया तकनीकी सहयोगी संस्था के रूप में सहभागिता कर रही है।
कार्यशाला का उद्घाटन उप विकास आयुक्त निहारिका छवि, वन प्रमंडल पदाधिकारी भोजपुर वन प्रमंडल आरा प्रद्युम्न गौरव, अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह तथा वेटलैंड्स इंटरनेशनल साउथ एशिया के आर्द्रभूमि विशेषज्ञ रवि प्रकाश एवं सरोज कुमार बारीक ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त निहारिका छवि ने कहा कि गोकुल जलाशय का संरक्षण एवं संवर्धन सभी संबंधित विभागों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। जलाशय के प्रभावी प्रबंधन के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सामूहिक सहभागिता आवश्यक है।
वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रद्युम्न गौरव ने कहा कि गोकुल जलाशय एक महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र है। इसके संरक्षण के लिए तैयार समेकित प्रबंधन योजना के माध्यम से जैव विविधता, जलीय पारिस्थितिकी और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, गैर-सरकारी संगठनों और आम नागरिकों से संरक्षण कार्यों में सक्रिय सहयोग की अपील की।
अपर समाहर्ता अरुण कुमार सिंह ने जलाशय के प्राकृतिक स्वरूप और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से संरक्षण एवं विकास कार्य करने की आवश्यकता बताई।
योजना के क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा
कार्यशाला के प्रथम दिन आर्द्रभूमि विशेषज्ञ रवि प्रकाश ने विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों एवं प्रतिनिधियों के साथ समेकित प्रबंधन योजना पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। इसमें संरक्षण गतिविधियों की प्राथमिकता, चरणबद्ध क्रियान्वयन, विभागीय जिम्मेदारियों और आपसी समन्वय के पहलुओं पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों से सुझाव भी प्राप्त किए गए।
कार्यशाला में जलाशय के आसपास की पंचायतों के मुखिया, संबंधित विभागों के पदाधिकारी, गैर-सरकारी एवं सामाजिक संगठनों तथा स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
आज होगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला के दूसरे दिन बुधवार को प्रबंधन प्रभावशीलता आकलन उपकरण पर प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक अभ्यास आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से जलाशय की वर्तमान प्रबंधन व्यवस्था का आकलन कर आवश्यक सुधारात्मक उपायों की पहचान की जाएगी। इस पहल से गोकुल जलाशय के सतत संरक्षण और दीर्घकालिक प्रबंधन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।




