जहरीली शराब से मौत के मुआवजे पर बंटा महागठबंधन

बिहार में शराबबंदी की ही तरह जहरीली शराब से मरे लोगों के स्वजनों को मुआवजा देने के प्रश्न पर भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपनों का पूरा साथ नहीं मिल रहा है। सारण में जहरीली शराब पीकर जान गंवाने वाले लोगों के स्वजनों को मुआवजा देने की मांग नीतीश पहले ही अस्वीकार कर चुके हैं।
विधानसभा में वाम दलों ने यह मांग की तो मुख्यमंत्री झल्लाकर बोले- कहिए तो शराबबंदी वापस ले लें। उन्होंने बाद में वाम दलों के विधायकों को समझाया कि वे मुआवजे की मांग न करें। उन्होंने वाम दलों को शराबबंदी का लाभ तक बता दिया। वाम दल चुप हो गए हैं, लेकिन उनकी स्थानीय इकाइयां यह मांग उठा रही हैं।
कांग्रेस भी मुआवजे के पक्ष में
मुख्यमंत्री ने वामदलों को तो समझा लिया, लेकिन सत्तारूढ़ महागठबंधन के तीसरे बड़े दल कांग्रेस को वे अब तक मुआवजा देने के नुकसान के बारे में नहीं बता पाए। प्रदेश कांग्रेस के नए अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह से इस बारे में पूछने पर जवाब मिला कि हम भी चाहते हैं सारण में जहरीली शराब पीकर मरने वाले लोगों के परिजनों को मुआवजा मिले। इस विषय पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बात करेंगे। वे संवेदनशील हैं। कोई न कोई निर्णय जरूर करेंगे।
मांझी की पतवार भाजपा के हाथ
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी शराबबंदी कानून का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने हमेशा थोड़ी मात्रा में शराब के सेवन को स्वास्थ्य के लिए लाभदायक बताया है। जहरीली शराब से हुई मौत के मुआवजे के मामले में भी उनकी राय मुख्यमंत्री से साफ अलग है। वे इस मोर्चे पर पूरी तरह भाजपा के साथ हैं कि राज्य सरकार मृतकों के स्वजनों को मुआवजा दे।




