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आषाढ़ की फुहारों संग बक्सर में धान रोपनी ने पकड़ी रफ्तार

बिजली कटौती चुनौती, किसानों में बेहतर पैदावार की उम्मीद बरकरार बनी

देखिए विडियो सिमरी/बक्सर। आषाढ़ माह की रिमझिम फुहारों ने बक्सर जिले के किसानों के चेहरे पर उम्मीद की नई मुस्कान ला दी है। बुधवार से गुरुवार तक रुक-रुक कर हुई हल्की बारिश के बीच जिले के विभिन्न क्षेत्रों में धान की रोपनी का कार्य तेज गति से चल रहा है। दियारा इलाके से लेकर दक्षिणी क्षेत्र तक खेतों में महिलाओं और मजदूरों की चहल-पहल देखने को मिल रही है। पारंपरिक लोकगीतों की मधुर स्वर लहरियों के बीच किसान शुभ मुहूर्त मानकर धान की रोपनी में जुटे हैं, जिससे ग्रामीण अंचल का वातावरण पूरी तरह कृषि संस्कृति में रंग गया है।
हालांकि किसानों के सामने बिजली की अनियमित आपूर्ति अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। खेतों की सिंचाई के लिए उन्हें रातभर बिजली आने का इंतजार करना पड़ता है। जैसे ही बिजली मिलती है, किसान तुरंत मोटर पंप चालू कर खेतों का पटवन शुरू कर देते हैं, ताकि रोपनी का काम समय पर पूरा हो सके।
किसान सुभाष यादव, शिवशंकर राय, कृपाशंकर चौबे, सियाराम चौहान और बद्रीनाथ यादव ने बताया कि इस बार समय पर हुई बारिश ने धान की रोपनी के लिए अनुकूल माहौल बनाया है, लेकिन यदि बिजली की आपूर्ति नियमित हो जाए तो किसानों को काफी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा, “आषाढ़ की यह अंतिम बारिश हमारे लिए उम्मीद की बूंदें लेकर आई है। अब सरकार यदि निर्बाध बिजली उपलब्ध करा दे तो खेत भी लहलहाएंगे और किसानों की मेहनत भी पूरी तरह सफल होगी।”
किसानों का कहना है कि समय पर रोपनी पूरी होने से धान की फसल बेहतर होने की संभावना बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में काम कर रही महिलाओं के पारंपरिक गीत कृषि संस्कृति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। बारिश और किसानों की मेहनत ने गांवों में उत्साह का माहौल बना दिया है।
कृषि जानकारों का भी मानना है कि यदि आगामी दिनों में मौसम अनुकूल बना रहा और सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था होती रही, तो इस वर्ष बक्सर जिले में धान का उत्पादन बेहतर होने की पूरी संभावना है। फिलहाल किसान मौसम की मेहरबानी और अपनी अथक मेहनत के सहारे अच्छी फसल की उम्मीद लगाए हुए हैं।

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