पत्रकार को धमकी पर भड़की भीम आर्मी, आंदोलन का ऐलान
एक सप्ताह में प्राथमिकी नहीं हुई तो एसपी कार्यालय घेरेंगे

सिमरी (बक्सर)। बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड अंतर्गत रामदास राय के डेरा थाना क्षेत्र के गंगोली गांव में सोशल मीडिया पत्रकार एवं अपना बिहार यूट्यूब न्यूज़ चैनल के संचालक जीत सक्सेना को कथित रूप से जान से मारने की धमकी देने तथा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अभद्र व्यवहार किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के विरोध में पत्रकार जीत सक्सेना तथा भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर आरोपितों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।
प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकार जीत सक्सेना ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को उठाने के कारण उन्हें लगातार प्रताड़ित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई होनी चाहिए।
इस अवसर पर भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेश आजाद एवं वर्तमान जिला उपाध्यक्ष सूर्य नारायण राम ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जिले के किसी भी पत्रकार के साथ धमकी, अभद्र व्यवहार या सामाजिक उत्पीड़न की घटना को संगठन गंभीरता से लेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि रामदास राय के डेरा थाना में एक सप्ताह के भीतर आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई तो भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता बक्सर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रामदास राय के डेरा थाना पहुंचे और थाना प्रभारी अभिषेक कुमार से मुलाकात कर मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि दोषियों को संरक्षण देने का कोई प्रयास हुआ तो संगठन सड़क से लेकर प्रशासनिक स्तर तक संघर्ष करेगा।
थाना प्रभारी अभिषेक कुमार ने आश्वासन देते हुए बताया कि मामले की जांच नियमानुसार की जा रही है तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपित को बख्शा नहीं जाएगा।
गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व पत्रकार जीत सक्सेना ने फेसबुक के माध्यम से बहुजन समाज के लोगों से एकजुट होने की अपील की थी, जिसके बाद यह विवाद सामने आया। अब पूरे मामले पर जिले की राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की नजर टिकी हुई है।




